गुरुवार, 1 जून 2017

ज़िंदगी के ज़ायके -2


( अरसे से पेंडिंग एक ज़ायका )

ज़िंदगी के ज़ायके अजब-अनूठे हैं लेकिन इस स्पेशल ज़ायके को चखने के लिए आपको एक अदद भूखे पेट के साथ बहुत सारी हिम्मत की जरूरत होगी। ये थाली बेशक देखने में साधारण सी है, लेकिन स्वाद ऐसा जो आपको ज़िंदगी भर याद रहे. . .


 लाल मिर्च. टमाटर और लहसुन की तेज़, तीखी और लाल चटख चटनी ... चटनी का ये हुलिया पढ़ने में जैसा लग रहा है हकीक़त में उससे कहीं ज़्यादा तीखा और मिर्च से भरपूर है, स्वाद ऐसा की ज़ुबान पर रखते ही आप आज से पहले खाई हुई हर तरह की लाल या हरी मिर्च को भूल जाएं। सिर्फ मिर्च का तीखापन ही नहीं, बल्कि इस चटनी का मिज़ाज आपके मिज़ाज से मेल खा जाए, इसका होना भी जरूरी है। इसके बगैर आप सिर्फ लाल मिर्च का तीखापन ही याद रख पाएंगे, पूरे स्वाद को सराहने के लिए दिल को मज़बूत करना बेहद जरूरी है। इस अहसास को आहिस्ता-आहिस्ता आप जज़्ब कर पाएं, इसलिए साथ में हैं सरसों के तेल में तले हुए करारे आलू (फ्रेंच फ्राईज़ का भारतीय संस्करण), इसे आपको खाना औऱ सराहना होगा, अगर आप मैकडॉनल्ड चाहते हैं तो वो यहां नहीं मिलेगा, लेकिन यहां जो आपको मिलेगा वो आपको यकीनन किसी और जगह नहीं मिलेगा, सिवाय आपके घर के जहां आप खुद से इस थाली को तैयार कर सकते हैं अपने स्वाद के हिसाब से। 
अगर आपको अभी भी थाली में मिर्च कम लग रही है तो अचार के लिए मसालेदार भरवां लाल-हरी मिर्च भी आपका बेसब्री से इंतज़ार कर रही है... आमतौर पर भरवां या अचार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिर्च उतनी तीखी नहीं होती है, लेकिन ये अचार वाली मिर्च तीखेपन के मामले में आपको ज़रा भी निराश नहीं करती है, आप खाते जाएं और आपके दिमाग में बजती घंटियां मसालों के असर तले सब कुछ बर्दाश्त करती जाएंगी।
 आलू और प्याज़ के भरवां परांठे, जिनमें आलू और प्याज़ के मिश्रण में बारीक कटी हुई हरी मिर्च और भीतरी परत पर लाल मिर्च और लहसुन का गाढ़ा लेप। और आप किसी तरह इसे खाने के लिए राज़ी हो जाए, इसके लिए भुने हुए जीरे और नमक वाली अनलिमिटेड छाछ।  

गर्मी की भरी दोपहरी में इस तरह का तीखा और मसालेदार भोजन खाने के लिए वाकई बहुत हिम्मत चाहिए, लेकिन जब आपको ज़ोरों की भूख लगी हो तो सारी हिम्मत आप कहीं से भी जुटा लेते हैं। ठीक इसी जगह पर, जहां अभी ये ढाबा है, वहां पर पहले कोई और ढाबा या होटल था जहां के ज़ायके का बंधु कुणाल पहले आनंद उठा चुके थे। जयपुर से अजमेर के रास्ते में इस बार खाने का वो ठिकाना तो नहीं मिला लेकिन उस ठिकाने पर ये अनूठा ज़ायका जरूर मिला, जो कई महीने बीत जाने के बाद आज भी ज़ुबान को उसी तरह महसूस हो जाता है। 


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