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पिछली बारिशों की एक शाम |
मई की तपती गर्मी के बीच राजधानी दिल्ली के निवासियों के लिए कुछ ‘राहत’ की फुहारें बहुत ‘सुकून’ लेकर आई हैं। पूरी
दिल्ली का सरकारी अमला इन दिनों दिल्ली के सीवेज़ और ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने
में जुटा है जिससे मॉनसून आने पर राजधानी के लोगों को किसी तरह की परेशानी का
सामना न करना पड़े। आपसी गिले-शिकवे, आरोप-प्रत्यारोप, नारे और वादे, समर्थकों से
वादाखिलाफी औऱ विरोधियों की छीछालेदर... सब कुछ मनों और टनों की मात्रा में सुबह
से शाम तक रोज़ाना गटर में बहाया जा रहा है जिससे इन पदार्थों की प्रवृति के अम्लीय
स्वभाव से शहर की गंदगी को साफ किया जा सके। आमतौर पर ये कवायद (कई बार देखा गया
है) मॉनसून के आने पर ही शुरु की जाती है लेकिन इस बाद माहौल बदला हुआ है।
कई प्रेस कॉन्फ्रेंसों के ज़रिए पहले से ही मच्छरों की
ब्रीडिंग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। जगह-जगह अनशन और धरनों के माध्यम से
नालों की सिल्ट, गाद साफ की जा चुकी है, नालियां चमचमा रही हैं। सिस्टम को इस हद
तक साफ कर दिया गया है कि आप यमुना नदी में गिरने वाले नालों में बेझिझक स्नान का
आनंद उठा सकते हैं। अत्यंत कड़े शब्दों में निंदा कर, दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम को
भी दुरुस्त कर लिया गया है। हालांकि कई बार विभागों के आपसी समन्वय और आंकड़ों के
मकड़जाल में उलझे रहने की वजह से इफेक्टिव मैनपावर और इफेक्टिव मैनआवर के बीच
तालमेल गड़बड़ाया जरूर है लेकिन इस बार हालात बदले हुए नज़र आ रहे हैं।
सेंट्रल
दिल्ली निवासी मिंटो ब्रिज और तिलक ब्रिज से जब इस बारे में बात की गई तो वे
मॉनसून को लेकर काफी उत्साहित नज़र आए। जलभराव का ज़िक्र उन्हें थोड़ा संजीदा कर
गया, पानी से भरी सड़क जब तालाब में तब्दील हो जाती है तो उन्हें बचपन के दिन याद
आ जाते हैं जब बच्चों के लिए तालाबों तक की किल्लत नहीं थी। यही कुछ उद्गार ज़खीरा
पुल ने भी व्यक्त किए, कई बारिशों में बसों की साफ-सफाई का काम ज़खीरा पुल के नीचे
और आस-पास तसल्लीबख्श तरीके से किया गया है। ऐसे और भी कई इलाके हैं, लेकिन सभी की
बात आप तक पहुंचाते-पहुंचाते हम अगले मॉनसून तक जा पहुंचेंगे। लेकिन हां, भयंकर
गर्मी और लू के थपेड़ों को सहने के बाद बारिश की बूंदों की बाट जोहते दिल्ली वालों
को जगह-जगह जलभराव के बहाने प्रकृति के नज़दीक आने का अवसर सालों से दिया जा रहा
है।
ट्विटर, इंस्टाग्राम औऱ फेसबुक के माध्यम से राजधानी जगमगा रही है,
राजधानी दिल्ली लंदन में तब्दील हो चुकी है। जियों के अनलिमिटेड डाटा के बोझ तले
फ्री वाई-फाई कसमसा रहा है। मॉनसून के लिए राजधानी को तैयार कर लेने के बाद फिलहाल
गर्मी में कई इलाकों में हो रही पानी सप्लाई में दिक्कत पर काबू पाने के लिए कई
खुलासों का सहारा लिया जा रहा है। पुराने रहस्यों को ज़ाहिर कर पाइपलाइनों
की मरम्मत का काम किया जा रहा है। राजधानी में जगह-जगह पोल-खोल महोत्सव आयोजित किए
जा रहे हैं जिससे साफ-सफाई के महत्व को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। नालों की सफाई
से निकली गाद और कीचड़ का इस्तेमाल धड़ल्ले से विरोधियों पर हमला बोलने के लिए
किया जा रहा है, जिससे कालिख हो या कीचड़ कुछ भी व्यर्थ न जाने दिया जाए।
जनता खुश
है...
राजधानी की बांछें खिल गई हैं...
बादलों के इंतज़ार में यमुना का जल
हिलोरें मार रहा है...
झकाझक साफ सड़कें कड़ी धूप में सेल्फी ले लेकर खिलखिला रही
हैं...
दिल्ली तैयार है...
बादल, बारिश ... मॉनसून...
सब नै आण दे !!!