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इन आंसुओं को
इन जवानों को
इन सवालों को
इन नामों को
इन तस्वीरों को
. . .
इन मातमों को
हम भूल जाएंगे ?
हमें !!!
राजनीति करनी है
शहादत पर
लाशों पर
जातियों पर
अगड़ों पर
पिछड़ों पर
बीफ और बिरयानी पर
अभी सियासत पकनी है
सुलगनी है
वोटों की हांडी
इंसानों की हड्डियों
की आंच मांगती है
इन आंसुओं से
वो हड्डियां पिघल सकती हैं
वो हड्डियां पिघल सकती हैं
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