सोमवार, 26 सितंबर 2016

सबक सिखाना होगा

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जिस तरह
हर भ्रष्ट की सोहबत में
 सभी भ्रष्टाचारी हैं...
जिस तरह
हर दुराचारी के परिजन दुराचारी हैं
जिस तरह
हर हत्यारे की नस्लें हत्यारी हैं
जिस तरह
ये शहर जहां हम रहते हैं
जिम्मेदार है
हर अपराध के लिए
जो यहां होता है
ठीक उसी तरह
दुश्मन देश का हर नागरिक
हमारा दुश्मन है
उनका बचपन
उनके अपने
सब तबाह होने दो
पेशावर के स्कूली बच्चे
उनको वहां ऊपर से सब देखने दो
एक रोते हुए बच्चे को तब सुना था
वो आतंकियों की नस्लें...
तबाह करना चाहता था
वो काम 
अब हमें करना होगा
उनकी फसलें
उनके किसान
उनके शहर
उनके खेत-खलिहान
सब नफरतों से जला देने हैं
उनके घरों में घुस कर
उनकी किताबें
पहचान...तहज़ीब
उनकी बोली... उनके मिज़ाज
उनके गीत...ग़ज़लें
मौसिकी
सब मिटाना होगा
लाहौर...कराची
नक्शे से मिटा देने होंगे
हमें वो सब निशान
जिनसे कभी वहां इंसानियत महफूज़ रही होगी
फिर वहां सिर्फ आतंकी बचेंगे
जिन्हें हम चुन-चुनकर मार सकेंगे
हमें छोटे दुश्मनों को पहले खत्म करना होगा
जो वैसे भी वहां रोज़ मर रहे हैं
हमें उनकी मौत को...
और आसान करना होगा...
वो हमारे दुश्मन हैं
हमें कोई रहम नहीं करना है
उनको उनकी औकात दिखानी ही होगी
आखिर
वहां
बच्चा-बच्चा
तैयार हो रहा है जंग के लिए
हमें यहां भी तैयारी करनी होगी
उनकी सरकार का सबक
उनकी आवाम को
सिखाना ही होगा

2 टिप्‍पणियां:

  1. I can realize from where these words has come, the truth you have told here.
    now there is no place and no logic to stay calm, the repetition of same work has snatched so many lives and its totally illogical.

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